डॉ.आकांक्षा मिश्रा

 

एक बरबाद की गई 

लड़की का उठकर खड़ी होना 

रास नही आया , 

चेतावनी दिया गया, तुझे अब शब्दों से तोड़ा जायेगा 

थोड़ी वह निराश हुई 

और तिलमिलाई । 

लेकिन घबराई नही 

यही लोगो के बीच एक मुद्दा बन गया 

यह टूटी नही 

खड़ी कैसे हो गई ? 

जरूर कोई बात होगी 

एक लड़की को लोगो ने इतना ही सिर्फ समझा 

गौर करिये जरा !

लड़कियों का अपना एक समाज है। 

इस पर कभी किसी ने विचार किया 

किया भी होगा

 सिर्फ भाषणों मे किसी दूसरे के घर 

की लड़कियों के लिए 

अपने घर की लड़कियों के लिए नही । 

 समाज मे 

एक नया मुद्दा हरदम ही उभरता रहा 

समाज कभी महिलाओं के हित मे खड़ा होता ।

इस पर

विचार करना जरूरी है 

पूरेे समाज मे एक गहरा मुद्दा बनकर रह गया । 

लेकिन विचार का कोई निष्कर्ष नही मिल सका! 

यह विचार सिर्फ फलता रहेगा,

 कभी समाज ,कभी परिवार, 

कभी पूरा कुनबा लड़कियों का विरोध करने मे 

अपना एक अच्छा खासा समय बरबाद करता ही रहेगा! 

 

  डॉ.आकांक्षा मिश्रा

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